कोई कहता है कोई नही है
जिदगी मेभी तू वही है
जान शकता हु में राही हु
फिरभी कहु में नही हु
आसमान से भी सच कह दे भी
वापसी कर दे तो बस निकल दे।
में बस नही हु तुझमे वही हु
शोर से जानकर रास्तो से रोककर नही हु
महेलकर टहलकर तेरी हस्ती में नही हु
लाइफ से जी कर मर्जी से जाकर में नही हु
कोई कहता है शोर नही है
जिदगी में तो बोर नही है
जान शकता हु में लइकर हु
फिरभी तुजसे में बाई कर हु
आसमान से भी लक कह दे
वापसी कर तू निकल दे
में बस नही हु तुझमे वही हु
કહેવા માટે શબ્દો નથી રહેવા માટે જગ્યા નથી સાંભરવા માટે લોકો નથી અને છેલ્લે જીવવા માટે એક સારી જિંદગી નથી
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